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उत्त्तराखण्ड चार धाम,ऑलवेदर रोड परियोजना हिमालयी पर्यावरण के लिए खतरा

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उत्त्तराखण्ड चार धाम,ऑलवेदर रोड परियोजना हिमालयी पर्यावरण के लिए खतरा,पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना 2020 उत्तराखंड के पर्यावरण सरोकारों के खिलाफ़ है।

उत्त्तराखण्ड राजीव गांधी पंचायत राज संगठन की टीम के द्वारा श्री बद्रीनाथ हाईवे पर ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट से पहाड़ों तथा आसपास के पर्यावरण को हो रहे नुकसान का अध्ययन किया । टीम ने ग्रामीणों से भी बात की । उन्होंने पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2020 (ईआईए) को उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों के पर्यावरणीय हितों के खिलाफ बताया ।

संगठन के प्रदेश संयोजक मोहित उनियाल ने कहा कि ईआईए, 2006 में बदलाव करने के लिए लाई गई ये नई अधिसूचना पर्यावरण विरोधी है और हमें समय में पीछे ले जाने वाली है । किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में सरकार को ऐसे कानूनों पर जनता की राय लेनी होती है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की संभावना होती है और कानून के प्रावधानों में उन्हें भागीदार बनाना होना होता है। पर्यावरण को लेकर ये नई अधिसूचना लोगों के इस अधिकार को छीनता है और पर्यावरण को बचाने में लोगों की भूमिका का दायरा बहुत कम करती है । वहीं दूसरी तरफ इसमें सरकार की फैसले लेने की विवेकाधीन शक्तियों को और बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

ईआईए अधिसूचना, 2020 ने एक सबसे चिंताजनक और पर्यावरण विरोधी प्रावधान ये शामिल किया गया है कि अब उन कंपनियों या उद्योगों को भी क्लीयरेंस प्राप्त करने का मौका दिया जाएगा जो इससे पहले पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करती आ रही हैं । इसे ‘पोस्ट-फैक्टो प्रोजेक्ट क्लीयरेंस कहते हैं । इससे पहले मोदी सरकार मार्च 2017 में भी इस तरह की मंजूरी देने के लिए अधिसूचना लेकर आई थी और उसी को यहां दोहराया जा रहा है । प्रावधानों के मुताबिक ईआईए अधिसूचना लागू होने के बाद यदि किसी कंपनी ने पर्यावरण मंजूरी नहीं ली है तो वो 2,000-10,000 रुपये प्रतिदिन के आधार पर फाइन जमा कर के मंजूरी ले सकती है। खास बात ये है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण के मामलों में इस तरह के प्रावधान को पहले ही खारिज कर दिया है ।

एक अप्रैल को अपने एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘पोस्ट फैक्टो पर्यावरण मंजूरी कानून के खिलाफ है। पीठ ने कहा था कि यह एहतियाती सिद्धांत के साथ-साथ सतत विकास की आवश्यकता के भी खिलाफ है । सरकार के ये सारे प्रावधान पर्यावरण संरक्षण के लिए बने मूल कानून के साथ ही गंभीर विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न करते हैं । सरकार व्यापार सुगमता के नाम पर पर्यावरण को गंभीर खतरा पहुंचाने का रास्ता खोल रही है जिससे सरकार की पर्यावरण विरोधी मंशा उजागर होती है ।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट उत्त्तराखण्ड चार धाम,ऑलवेदर रोड बनाने के लिये हज़ारों पेड़ व कई जगह पहाड़ को काटा गया है । गुजरात मॉडल की बात करने वालो ने उत्त्तराखण्ड को यह विनाशकारी मॉडल दिया है । 12 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट में मार्ग में अभी तक करीब 175 जगह पहाड़ काटा गया है ,100 से ज्यादा जगह भूस्खलन क्षेत्र बन चुके हैं जिनसे आने वाले समय मे बड़ा खतरा पैदा होगा । 100 किमी से ज्यादा में पर्यावरण मंजूरी लेनी जरूरी है इसलिये सरकार ने इस 900 किमी रोड के प्रोजेक्ट को 53 प्रोजेक्ट में बांट दिया है ताकि इसकी जरूरत न पड़े ।

पर्यावरण नियमो की खुले आम धज्जियां उड़ाई गई है । जो बड़ा नुकसान किया जा चुका है उसकी भरपाई कैसे करेगी सरकार । सरकार की जिद्द 12 मीटर रोड बनाने की है
क्योंकि 12 मीटर पर टोल टैक्स लग सकेगा व इससे सरकार की कमाई हो पाएगी । यूरोप के पहाड़ो में इससे ज्यादा ट्रैफिक होने के बावजूद भी इतनी चौड़ी सड़क नही हैं । हाई पावर कमिटी का मानना है कि अगर 7 से 8 मीटर तक सड़क बनती है तो इससे पर्यावरण को होने वाले 80 से 90 प्रतिशत नुकसान को रोका जा सकेगा । माननीय उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया है कि सरकार को 2018 के सर्कुलर को मानते हुए 12 मीटर सड़क की जगह अब सिर्फ 5.5 मीटर सड़क ही बनाई जा सकेगी । मगर जो बड़ा नुकसान हो चुका है उसकी भरपाई कौन करेगा ।

उधर कर्णप्रयाग रेल मार्ग बनाने का काम भी जोरो से चल रहा है जिसमे पहाड़ को काट कर सुरंग बनाई जा रही है

ग्रामीणों ने बताया कि सुरंग बनाने के लिए जोरदार धमाके किये जा रहे हैं जिससे आस पास गांव की धरती हिल जाती है व बड़ा खतरा बना रहता है । इस रेल मार्ग में पहाडी क्षेत्र में मौजूद पानी के प्राकृतिक स्रोत भी खतरे में हैं व खत्म होने के कागार पर हैं ।

उत्त्तराखण्ड राज्य में कई पावर प्रोजेक्ट जिनसे भारी नुकसान हो सकता है,वह भी पर्यावरण क्लीयरेंस की वजह से रुके हैं । पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना (EIA) अगर कानून में परिवर्तित हो गई तो फिर ऑल वेदर रोड व ऐसे पावर प्रोजेक्ट से होने वाली हानि को कोई नही रोक सकेगा । सरकार और बड़े उद्योगपतियों को पर्यावरण की धज्जियां उड़ाने का प्रमाण पत्र मिल जाएगा ।

पूरे प्रदेश में विचार गोष्ठी व अन्य कार्यक्रमो के द्वारा इस अधिसूचना का विरोध दर्ज किया जा रहा है । उत्त्तराखण्ड राज्य को ऐसे विकास की जरूरत नही है जो पर्यावरण व जनता को विनाश की और ले जाएगा । अभी तक राजीव गांधी पंचायत राज संगठन द्वारा गढ़वाल व कुमाऊँ के कई जिलों में विचार गोष्ठी कर इस अधिसूचना का विरोध दर्ज किया गया है । आने वाले समय मे पूरे प्रदेश में ऐसे पर्यावरण व जन विरोधी ड्राफ्ट का विरोध दर्ज किया जाएगा जिससे उत्त्तराखण्ड ऑल वेदर रोड जैसे हानिकारक प्रोजेक्ट से होने वाली भारी तबाही को रोका जा सकेगा । इस दौरान ब्रिज मोहन,सुनील,राहुल सैनी,हर्षित उनियाल व शुभम काम्बोज आदि उपस्थित थे ।

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